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पश्चिमीकरण किसे कहते हैं ?

पश्चिमीकरण एक सामाजिक प्रक्रिया है जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज को पश्चिमी दुनिया के सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, और तकनीकी मूल्यों के साथ जोड़ना है। यह एक समाजशास्त्रिक और आर्थशास्त्रिक प्रक्रिया है जिसमें भारतीय समाज में परिवर्तन की दिशा में पश्चिमी विचारधारा के प्रारंभिक सिद्धांतों का पालन किया जाता है।

पश्चिमीकरण को विद्या, विचार, सांस्कृतिक या तकनीकी प्रगति की दृष्टि से पश्चिम या पश्चिमी देशों की दिशा में होने वाले परिवर्तन का परिभाषित किया जा सकता है। यह एक सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, और सांस्कृतिक प्रक्रिया हो सकती है जो किसी समृद्धि या विकास की दिशा में अधिक पश्चिमी देशों के अनुकरण को प्रेरित करती है।

डॉ. श्रीनिवास की पश्चिमीकरण की अवधारणा

भारत में 19वीं और 20वीं शताब्दी में अंग्रेजी शासन काल में जो परिवर्तन हो रहे थे, उन परिवर्तनों के लिए डॉ श्रीनिवास ने पश्चिमीकरण शब्द का प्रयोग किया। भारतीय समाज में परिवर्तन का अध्ययन करने के दौरान डॉ. एम.एन. श्रीनिवास ने दो प्रमुख अवधारणाओं को प्रस्तुत किया – संस्कृतिकरण और पश्चिमीकरण I पश्चिमीकरण परिवर्तन की एक प्रक्रिया है जिसमें भारतीय समाज पश्चिमी देशों की संस्कृति, पोषाक, खान-पान, शिक्षा, रहन-सहन का अनुसरण करती है उन्हें अपनाती है।

डॉ. श्रीनिवास ने पश्चिमीकरण को स्पष्ट करते हुए लिखा है कि ‘‘मैंने पश्चिमीकरण शब्द का प्रयोग भारतीय समाज व संस्कृति में उन परिवर्तनों के लिए किया है जो एक सौ पचास वर्षों से अधिक समय के अंग्रेजी राज के परिणाम स्वरूप उत्पन्न हए हैं और यह शब्द प्रौद्योगिकी, संस्थाओं, वैचारिक मूल्यों आदि विभिन्न स्तरों पर होने वाले परिवर्तनों का समावेश करता है।‘‘

आधुनिक भारत का जो हम स्वरूप देख रहे है वो पश्चिमीकरण का ही परिणाम है। अंग्रेजी शासन काल से ही अंग्रजो की सभ्यता संस्कृति का भारतीय समाज पर प्रभाव देखने को मिलता है और तभी से भारतीय समाज पाश्चात्य सभ्यता के संपर्क में आया। भारतीय समाज पर पाष्चात्य संस्कृति का प्रभाव जाति व्यवस्था, धर्म, विवाह, रहन-सहन, खान-पान, संस्कृति से लेकर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भी पड़ा है।

पश्चिमीकरण के दृष्टिकोण से, यह अक्सर विज्ञान, तकनीक, आधुनिकीकरण, शिक्षा, आर्थिक प्रगति, और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में होने वाले बदलाव को सूचित करता है। यह प्रक्रिया भारत जैसे देशों में भी देखी जा सकती है जहाँ समृद्धि और विकास के लिए पश्चिमी मॉडल और प्रथाओं का अनुसरण किया जाता है।

पश्चिमीकरण ने विश्व में समाज, अर्थ, और सांस्कृतिक बदलाव को गहराई से प्रभावित किया है, लेकिन इसके साथ ही यह विशिष्ट सामाजिक और राजनीतिक परिणामों को भी उत्पन्न कर सकता है।

पश्चिमीकरण के उदाहरण

पश्चिमीकरण के उदाहरण कई प्रकार के हो सकते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में हुए हैं। यहां कुछ उदाहरण दिए जा रहे हैं:

  1. तकनीकी विकास: विज्ञान और तकनीक में उन्नति पश्चिमीकरण का एक प्रमुख उदाहरण है। उदाहरणस्वरूप, विज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, और आधुनिक मशीनों के प्रयोग के माध्यम से समृद्धि और विकास होता है।
  2. शिक्षा: उच्च शिक्षा की प्रवृत्ति भी पश्चिमीकरण का एक उदाहरण है। शिक्षा में नवाचार, आधुनिक शिक्षा तंत्र, और शैक्षिक प्रौद्योगिकियों का प्रयोग करके शिक्षा के क्षेत्र में सुधार होता है।
  3. आधुनिकीकरण: आधुनिकीकरण के अंतर्गत व्यापार, उद्योग, और व्यावसायिक विकास भी आते हैं। नए उद्यमों की स्थापना, तकनीकी सुधार, और आधुनिक उपकरणों के प्रयोग से आर्थिक विकास होता है।
  4. सामाजिक सुधार: पश्चिमीकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक सुधार है। यह आर्थिक और सामाजिक बदलावों के माध्यम से जनसंख्या को शिक्षित, स्वास्थ्यपूर्ण, और सुरक्षित बनाने का प्रयास करता है।
  5. सांस्कृतिक परिवर्तन: पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से, सांस्कृतिक परिवर्तन भी होता है। उदाहरणस्वरूप, वस्त्र, आहार, और जीवनशैली में परिवर्तन आता है जो विभिन्न लोगों के जीवन में प्रभाव डालता है।
  6. राजनीतिक सुधार: राजनीतिक व्यवस्था में भी पश्चिमीकरण का प्रभाव होता है। डेमोक्रेसी, मानवाधिकार, स्वतंत्रता आदि के प्रति जागरूकता और इनके अनुसरण में सुधार होता है।
  7. मीडिया और कला: पश्चिमीकरण के द्वारा मीडिया और कला के क्षेत्र में भी बदलाव आता है। नई मीडिया प्रौद्योगिकियों का प्रयोग करके सूचना पहुंचाने के तरीके बदलते हैं और कला में नवाचार होता है।

ये उदाहरण दिखाते हैं कि पश्चिमीकरण के क्षेत्र में विभिन्न तरह के परिवर्तन हो सकते हैं जो समाज की उन्नति और विकास की दिशा में मदद कर सकते हैं।

पश्चिमीकरण की विशेषताएँ

डॉ. श्रीनिवास ने पश्चिमीकरण की कुछ विशेषताओं का उल्लेख किया है

  1. नैतिक रूप से तटस्थ
  2. एक व्यापक अवधारणा
  3. एक वैज्ञानिक अवधारणा
  4. अनेक प्रारूप
  5. जटिल तथा बहुस्तरीय प्रक्रिया
  6. चेतन और अचेतन प्रक्रिया

पश्चिमीकरण की विशेषताएँ उस सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन को संकेतित करती हैं जिसमें पश्चिमी देशों के संस्कृति, तकनीक, और विकास के मूल्यों का प्रभाव होता है। यहां कुछ पश्चिमीकरण की मुख्य विशेषताएँ दी गई हैं:

  1. विज्ञान और तकनीकी उन्नति: पश्चिमीकरण में विज्ञान और तकनीकी उन्नति को महत्वपूर्ण माना जाता है। नए और आधुनिक तकनीकी उपकरणों का प्रयोग करके समाज में उन्नति होती है जो आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन को प्रेरित करती है।
  2. शिक्षा और शिक्षांतर: पश्चिमीकरण में शिक्षा को महत्वपूर्ण बताया जाता है। विशेष रूप से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए तरीकों का प्रयोग करके शिक्षा में सुधार होता है जो समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  3. स्वतंत्रता और अधिकार: पश्चिमीकरण में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानवाधिकार, और न्याय को महत्व दिया जाता है। समाज के लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है और उन्हें स्वतंत्रता का अधिकार दिलाया जाता है।
  4. सामाजिक न्याय और समानता: पश्चिमीकरण के अंतर्गत सामाजिक न्याय और समानता की प्राथमिकता होती है। यह समाज में अन्याय और विभिन्नता के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  5. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संबंध: पश्चिमीकरण के द्वारा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत होते हैं। विभिन्न देशों के बीच विकास के क्षेत्र में सहयोग और आपसी बदलाव होते हैं।
  6. मानवाधिकार और मूलभूत लिबरलिज्म: पश्चिमीकरण में मानवाधिकार और मूलभूत लिबरलिज्म को महत्वपूर्ण बताया जाता है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकार के प्रति समर्पण इसमें शामिल होता है।
  7. आर्थिक विकास और उद्योगीकरण: पश्चिमीकरण में आर्थिक विकास और उद्योगीकरण को बढ़ावा दिया जाता है। नए उद्यमों की स्थापना और औद्योगिक विकास के माध्यम से आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

ये विशेषताएँ पश्चिमीकरण के रूप, प्राथमिकताएँ, और मूल्यों को दर्शाती हैं जो समाज के विकास और सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पश्चिमीकरण का भारतीय समाज पर प्रभाव

  1. सामाजिक जीवन पर प्रभाव – पारिवारिक संरचना में परिवर्तन, विवाह में परिवर्तन, स्त्रियों की स्थिति में परिवर्तन
  2. धार्मिक जीवन पर प्रभाव – धार्मिक अन्धविश्वास, कर्मकाण्ड, रीति-रिवाज
  3. राजनीतिक जीवन पर प्रभाव – प्रशासनिक दृष्टि से कई टुकड़ो में बटी थी। सत्ता गॉव के पंचायतों के हाथ में होती थी। संपूर्ण भारत एक राजनीतिक सत्ता संगठित हुई
  4. कलाओं में परिवर्तन – नृत्य कला, चित्रकला, संगीत, भवन निर्माण,
  5. शिक्षा के क्षेत्र में प्रभाव – भारत में गुरूकुल की परम्परा थी हिन्दी या संस्कृत भाषा में ही शिक्षा ग्रहण की जाती थी
  6. आर्थिक क्षेत्र में प्रभाव – कृषि एवं कुटीर व्यवसाय  औद्योग, बड़े- बड़े कारखाने, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

पश्चिमीकरण का भारतीय समाज पर प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों में महसूस होता है, जिसमें सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, और तकनीकी परिवर्तन शामिल हो सकते हैं। यहां पश्चिमीकरण के भारतीय समाज पर प्रभाव के कुछ प्रमुख पहलुओं को देखा जा सकता है:

  1. शिक्षा और विज्ञान: पश्चिमीकरण के प्रभाव से भारत में शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रौद्योगिकी और शैक्षिक उपकरणों का प्रयोग हो रहा है और यहां पूर्वाग्रह भी कम हो रहा है।
  2. तकनीकी विकास: पश्चिमीकरण के प्रभाव से भारत में तकनीकी उन्नति हुई है। नए तकनीकी उपकरणों, आधुनिक मशीनों, और सूचना प्रौद्योगिकियों का प्रयोग बढ़ गया है जो आर्थिक और सामाजिक विकास में मदद करते हैं।
  3. आर्थिक विकास: पश्चिमीकरण के प्रभाव से भारत में आर्थिक विकास हुआ है। व्यापार, उद्योग, और सेवा क्षेत्र में नए उद्यम और व्यवसायों की स्थापना हुई है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
  4. सांस्कृतिक परिवर्तन: पश्चिमीकरण के प्रभाव से भारतीय समाज में सांस्कृतिक परिवर्तन हुआ है। वस्त्र, आदर्श, और जीवनशैली में परिवर्तन आया है जो पश्चिमी देशों की प्रेरणा से हुआ है।
  5. मीडिया और सूचना: पश्चिमीकरण के प्रभाव से मीडिया और सुचना के क्षेत्र में भी बदलाव आया है। नई मीडिया प्रौद्योगिकियों का प्रयोग करके सूचना के पहुंचाने के तरीके बदले हैं और समाज में जागरूकता बढ़ी है।
  6. राजनीतिक सुधार: पश्चिमीकरण के प्रभाव से भारत में राजनीतिक सुधार हुए हैं। डेमोक्रेसी, मानवाधिकार, और स्वतंत्रता के मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जाता है और लोगों को राजनीतिक समर्थन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
  7. सामाजिक सुधार: पश्चिमीकरण के प्रभाव से सामाजिक सुधार की प्रक्रिया में बदलाव हुआ है। आर्थिक और सामाजिक बदलावों के माध्यम से जनसंख्या को शिक्षित, स्वास्थ्यपूर्ण, और सुरक्षित बनाने के लिए प्रयास किया जाता है।

यह प्रमुख प्रभाव दिखाते हैं कि पश्चिमीकरण का भारतीय समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सुधार होता है और समाज की उन्नति होती है।

पश्चिमीकरण
community development in India

पश्चिमीकरण एवं समाज कार्य

पश्चिमीकरण एक सामाजिक प्रक्रिया है जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज को पश्चिमी दुनिया के सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, और तकनीकी मूल्यों के साथ जोड़ना है। यह एक समाजशास्त्रिक और आर्थशास्त्रिक प्रक्रिया है जिसमें भारतीय समाज में परिवर्तन की दिशा में पश्चिमी विचारधारा के प्रारंभिक सिद्धांतों का पालन किया जाता है।

पश्चिमीकरण का समाज कार्य में महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह निम्नलिखित कुछ क्षेत्रों में परिवर्तन लाता है:

  1. शिक्षा: पश्चिमीकरण के तत्वों का प्रयोग करके शिक्षा में सुधार होता है। यह शिक्षा के मानकों को ऊँचा करने के लिए विभिन्न उपायों का प्रयोग करता है और छात्रों को आधुनिक तकनीकी उपकरणों से अवगत कराने का प्रयास करता है।
  2. स्वास्थ्य: पश्चिमीकरण के सिद्धांतों के अनुसार स्वास्थ्य की देखभाल में सुधार किया जाता है। स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और औद्योगिकीकरण का प्रयोग करके लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएँ मजबूती से पहुंचाई जाती है।
  3. रोजगार और आर्थिक विकास: पश्चिमीकरण के प्रारंभिक सिद्धांतों का अनुसरण करके भारत में रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। नए उद्यमों की स्थापना, उद्योगीकरण, और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करके आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
  4. सामाजिक सुधार: पश्चिमीकरण के माध्यम से सामाजिक सुधारों की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। जनसंख्या के शिक्षित, स्वास्थ्यपूर्ण, और सक्षम बनाने के लक्ष्य से प्रोत्साहित किया जा सकता है।
  5. राजनीतिक सुधार: पश्चिमीकरण के सिद्धांतों के अनुसार राजनीतिक सुधार किए जा सकते हैं, जैसे कि डेमोक्रेसी को मजबूती से स्थापित करना और मानवाधिकारों का पालन करना।

पश्चिमीकरण के सिद्धांतों का समाज कार्य में उपयोग करके सामाजिक और आर्थिक सुधार की प्रक्रिया में मदद की जा सकती है और समाज के विकास को गति दिला सकती है।

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